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श्रद्धांजलि

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"राजनीति के चरित्र में एक ही ख़ूबी है  उसका कोई चरित्र नहीं होता" हिंदी के सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार,मध्यप्रदेश के उज्जैन में जन्मे श्री शरद जोशी जी के जन्मदिवस पर उन्हें #श्र...

अच्छा रिजल्ट न आए,तो निराश न हों छात्र

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              कल मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मण्डल के 10वीं ,12वीं,के परिणाम घोषित होने वाले हैं।हो सकता है,किसी कारणवश कुछ भाई-बहनों के परीक्षा परिणाम अच्छे न आएं,तो बिल्कुल ...

मुख्यधारा से जुड़ता आदिवासी समाज -पद्मेश गौतम

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 पिछले डेढ़ दशक से मध्य प्रदेश के जनजाति समाज की स्थिति में तेजी से बदलाव हुआ है।कठिन परिश्रम और ईमानदारी से जीवन जीने वाला यह समाज जोकि आजादी के बाद भारतीय मूल संस्कृति को संरक्षित किये हुए कष्ट पूर्ण जीवन जी रहा था।उसमे अब परिवर्तन नजर आने लगा है। अंग्रेजों के विरूद्ध स्वतंत्रता के लिए युद्ध का आरंभ आदिवासी समाज द्वारा ही हुआ ,और यही कारण था कि अंग्रेजों ने उन्हें असहाय एवं निरीह बनाने का काम किया।ऐतिहासिक तथ्य है, कि अंग्रजों को भारत से भगाने के लिए पहला विद्रोह तिलका मांझी ने सन 1824 में अंग्रेज कमिश्नर क्लीवलैंड को तीर से मार गिराकर किया था। आदिवासी समाज के क्रांतिवीर बिरसा मुंडा ने सन 1890 में अंग्रेजों के लोहा लिया।ऐसे अनेक आदिवासी क्रांतिकारियों की आजादी के लिए संघर्ष,बलिदान गाथाएँ हैं। सहज सरल इस समाज पर आजादी के बाद से ही क्रिश्चियन मशीनरी ने आदिवासी इलाकों में सेवा करने के नाम पर धर्मांतरण का घ्रणित खेल खेला।धर्मांतरण प्रायः बलपूर्वक या बहला फुसलाकर किए गए। भारतीय स्वयं सेवक संघ ने ईसाई मिशनरियों से आदिवासी समाज को बचाने के लिए अभियान चलाकर धर्मांतरण रोकने और धर्म...

" श्रमिक हमारे निर्माता "- पद्मेश गौतम (मजदूर दिवस पर विशेष)

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श्रमिकों की हमारे देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका है।श्रमिक के बिना किसी भी निर्माण की कल्पना अधूरी है,चाहे वह औद्योगिक ढांचा हो अथवा किसी अन्य तरह का निर्माण। आज इ...

बेरोजगारी राष्ट्रनिर्माण में बाधक - पद्मेश गौतम

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आज बेरोजगारी देश की प्रमुख समस्या बनती जा रही है। इसका प्रमुख कारण जनसंख्या वृद्धि, पूँजी की कमी,अनुपयुक्त शिक्षा प्रणाली आदि है । यह समस्या आधुनिक समय में युवावर्ग के लि...

जलसंरक्षण एक मिशन - पद्मेश गौतम

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मानव की उत्पत्ति के पूर्व से श्रृष्टि की रचना के साथ पांच तत्व हैं - जल,वायु,अग्नि,आकाश,प्रथ्वी। कभी हम कल्पना करें कि यदि इनमे से एक भी तत्व समाप्त हो जाए तो क्या होगा..? क्या जीवन संभव होगा..? हम अनभिज्ञ हैं,ऐसा नही है।सब जानते हुए भी हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए संकट पैदा कर रहे हैं।जिस तरह से पानी की बर्बादी हो रही है,वह अत्यंत खतरनाक है।वर्तमान में प्रत्येक नागरिक को एक मिशन के रूप में जलसंरक्षण पर काम करना चाहिए। आज देखा जा रहा है,कि नदी -तालाब सूख रहे हैं।प्रथ्वी का जलस्तर तेजी से घट रहा है।इसके अनेक कारण हैं,उनमें से तेजी से बढ रहे औद्योगिकरण एवं जंगलों का लगातार नष्ट होना भी है।जिससे वायु प्रदूषण के साथ जलस्तर भी नीचे जा रहा है।कुछ फैक्ट्री व कारखानों में बहुत अधिक पानी की आवश्यकता होती है,जोकि सीधे प्रथ्वी के नीचे से पानी की निकासी करते हैं। यहां तक कि हमारे घरों में भी छोटे छोटे काम के लिए भी इलेक्ट्रिक पंप के माध्यम से आवश्यकता से अधिक पानी का अपव्यय किया जाता है।हालत यह है,कि पशु पक्षियों के लिए भी पीने का पानी नहीं है। हम विचार करें कि यदि जलसंरक्षण नहीं करेंगे,...

" समाज का बंटवारा करने वालों से सावधान रहने की जरूरत "

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आजादी के बाद से अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए जिस तरह से समाज को बांटने का काम हुआ वह दुर्भाग्य पूर्ण है।यद्यपि कुछ राजनेताओं ने समाज से गैर बराबरी,असमानता मिटाने की कोशिश की और परिणाम भी मिले।परन्तु इसके विपरीत कुछ राजनेता समाज में वैमनस्यता की आग लगाने में सफल रहे। इन सबके बीच राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने समाज के एकीकरण का निरंतर अभियान चलाकर संपूर्ण समाज को एकता की सूत्र में पिरोने का काम किया। देश में दलित बनाम सवर्ण की राजनीति करने वालों की समीक्षा करने पर ज्ञात होता है,कि उन्होने दलित समाज का उत्थान तो नहीं किया अपितु स्वयं का उत्थान उनकी प्राथमिकता रही है।वर्तमान राजनीति में सुश्री मायावती इसका जीवंत उदाहरण हैं।दलित राजनीति के नाम पर उन्होंने राज किया और अथाह संपत्ति अर्जित की।यदि वो दलित समाज की हितैषी होतीं तो संपत्ति को बैंकों में जमा करने के बजाय बेरोजगार दलित नौजवानों को रोजगार देने में खर्च करतीं तो समाज का उत्थान होता। वर्तमान में आरक्षण पर बहस होती है।मैं इस बहस में नहीं जाना चाहता,परन्तु यह कहने में भी संकोच नहीं कि योग्यता को आरक्षण की कोई आवश्यकता न...