मुख्यधारा से जुड़ता आदिवासी समाज -पद्मेश गौतम
पिछले डेढ़ दशक से मध्य प्रदेश के जनजाति समाज की स्थिति में तेजी से बदलाव हुआ है।कठिन परिश्रम और ईमानदारी से जीवन जीने वाला यह समाज जोकि आजादी के बाद भारतीय मूल संस्कृति को संरक्षित किये हुए कष्ट पूर्ण जीवन जी रहा था।उसमे अब परिवर्तन नजर आने लगा है।
अंग्रेजों के विरूद्ध स्वतंत्रता के लिए युद्ध का आरंभ आदिवासी समाज द्वारा ही हुआ ,और यही कारण था कि अंग्रेजों ने उन्हें असहाय एवं निरीह बनाने का काम किया।ऐतिहासिक तथ्य है, कि अंग्रजों को भारत से भगाने के लिए पहला विद्रोह तिलका मांझी ने सन 1824 में अंग्रेज कमिश्नर क्लीवलैंड को तीर से मार गिराकर किया था।
आदिवासी समाज के क्रांतिवीर बिरसा मुंडा ने सन 1890 में अंग्रेजों के लोहा लिया।ऐसे अनेक आदिवासी क्रांतिकारियों की आजादी के लिए संघर्ष,बलिदान गाथाएँ हैं।
सहज सरल इस समाज पर आजादी के बाद से ही क्रिश्चियन मशीनरी ने आदिवासी इलाकों में सेवा करने के नाम पर धर्मांतरण का घ्रणित खेल खेला।धर्मांतरण प्रायः बलपूर्वक या बहला फुसलाकर किए गए।
भारतीय स्वयं सेवक संघ ने ईसाई मिशनरियों से आदिवासी समाज को बचाने के लिए अभियान चलाकर धर्मांतरण रोकने और धर्मांतरित हो चुके लोगों को पुनः मूल संस्कृति से जोडने का काम किया।
परन्तु दुर्भाग्य यह रहा कि पूर्व की सरकारों ने आदिवासी उत्थान के नाम पर खजाने खाली कर दिए,परन्तु सरकार के नुमाइंदे और सरकारी नौकरशाहों ने आदिवासी हितों की योजनाओं से अपने बैंक बेलेंस बढाए।भोले भाले आदिवासी अशिक्षित होने के कारण ठगे गए।जहां थे वहीं रह गए। उनकी सरलता और विश्वास को हथियार बनाकर, उन्हें झूठे आश्वासन देकर अनेक वर्षों तक सत्ता में रहे एक दल ने आदिवासी समाज का निरंतर शोषण किया।
अनेक वर्षों तक शोषित,उपेक्षित जनजाति समाज की दशा और दिशा में पिछले कुछ वर्षों में परिवर्तन आया है।पिछड़ेपन को पीछे करने और शिक्षा के क्षेत्र में भी हमारा जनजाति समाज प्रगतिशील है।
मध्यप्रदेश की सरकार ने पिछले 15 वर्षों में जनजाति समाज के लिए लगभग 2215 अरब रूपये खर्च किए हैं।एकलव्य विद्यालय,गुरूकुलम,वनाधिकार पट्टे,विदेश में शिक्षा सहित अनेक आदिवासी हितैषी योजनायें कारगर सिद्ध हुई हैं।वर्तमान केन्द्र सरकार द्वारा भी इस समाज के सर्वांगीण विकास के लिए नितनई योजनायें क्रियान्वित की जा रही हैं।
और इसी का परिणाम है,कि प्रदेश के जनजाति समाज का शैक्षणिक,आर्थिक सभी प्रकार का विकास हो रहा है।
अब आवश्यकता इस बात की है,कि जनजाति समाज के युवा रोजगार मूलक योजनाओं का लाभ लें,अपने अधिकारों,शासन की योजनाओं का लाभ लेने के लिए सजग रहें।और अपने समाज के उत्थान के साथ राष्ट्र के उत्थान में भी सहभागी बनें।


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