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Showing posts from April, 2018

बेरोजगारी राष्ट्रनिर्माण में बाधक - पद्मेश गौतम

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आज बेरोजगारी देश की प्रमुख समस्या बनती जा रही है। इसका प्रमुख कारण जनसंख्या वृद्धि, पूँजी की कमी,अनुपयुक्त शिक्षा प्रणाली आदि है । यह समस्या आधुनिक समय में युवावर्ग के लि...

जलसंरक्षण एक मिशन - पद्मेश गौतम

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मानव की उत्पत्ति के पूर्व से श्रृष्टि की रचना के साथ पांच तत्व हैं - जल,वायु,अग्नि,आकाश,प्रथ्वी। कभी हम कल्पना करें कि यदि इनमे से एक भी तत्व समाप्त हो जाए तो क्या होगा..? क्या जीवन संभव होगा..? हम अनभिज्ञ हैं,ऐसा नही है।सब जानते हुए भी हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए संकट पैदा कर रहे हैं।जिस तरह से पानी की बर्बादी हो रही है,वह अत्यंत खतरनाक है।वर्तमान में प्रत्येक नागरिक को एक मिशन के रूप में जलसंरक्षण पर काम करना चाहिए। आज देखा जा रहा है,कि नदी -तालाब सूख रहे हैं।प्रथ्वी का जलस्तर तेजी से घट रहा है।इसके अनेक कारण हैं,उनमें से तेजी से बढ रहे औद्योगिकरण एवं जंगलों का लगातार नष्ट होना भी है।जिससे वायु प्रदूषण के साथ जलस्तर भी नीचे जा रहा है।कुछ फैक्ट्री व कारखानों में बहुत अधिक पानी की आवश्यकता होती है,जोकि सीधे प्रथ्वी के नीचे से पानी की निकासी करते हैं। यहां तक कि हमारे घरों में भी छोटे छोटे काम के लिए भी इलेक्ट्रिक पंप के माध्यम से आवश्यकता से अधिक पानी का अपव्यय किया जाता है।हालत यह है,कि पशु पक्षियों के लिए भी पीने का पानी नहीं है। हम विचार करें कि यदि जलसंरक्षण नहीं करेंगे,...

" समाज का बंटवारा करने वालों से सावधान रहने की जरूरत "

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आजादी के बाद से अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए जिस तरह से समाज को बांटने का काम हुआ वह दुर्भाग्य पूर्ण है।यद्यपि कुछ राजनेताओं ने समाज से गैर बराबरी,असमानता मिटाने की कोशिश की और परिणाम भी मिले।परन्तु इसके विपरीत कुछ राजनेता समाज में वैमनस्यता की आग लगाने में सफल रहे। इन सबके बीच राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने समाज के एकीकरण का निरंतर अभियान चलाकर संपूर्ण समाज को एकता की सूत्र में पिरोने का काम किया। देश में दलित बनाम सवर्ण की राजनीति करने वालों की समीक्षा करने पर ज्ञात होता है,कि उन्होने दलित समाज का उत्थान तो नहीं किया अपितु स्वयं का उत्थान उनकी प्राथमिकता रही है।वर्तमान राजनीति में सुश्री मायावती इसका जीवंत उदाहरण हैं।दलित राजनीति के नाम पर उन्होंने राज किया और अथाह संपत्ति अर्जित की।यदि वो दलित समाज की हितैषी होतीं तो संपत्ति को बैंकों में जमा करने के बजाय बेरोजगार दलित नौजवानों को रोजगार देने में खर्च करतीं तो समाज का उत्थान होता। वर्तमान में आरक्षण पर बहस होती है।मैं इस बहस में नहीं जाना चाहता,परन्तु यह कहने में भी संकोच नहीं कि योग्यता को आरक्षण की कोई आवश्यकता न...

" राजनीति के अद्वितीय पथिक,डाॅ.नरोत्तम मिश्र जी"(जन्मदिवस पर विशेष)

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मानव जीवन में किसी बडे मुकाम पर पहुंचकर एक साधारण व्यक्ति की तरह व्यवहार करने वाले विरले ही होते हैं।डाॅ.नरोत्तम मिश्र उन्ही विरले महापुरुषों में से एक हैं।उनका सरल,सहज,संवेदनाओं से परिपूर्व स्वभाव आकर्षण का केंद्र है।किसी अजनबी से भी मिलकर, कुछ पल में ही अपना बना लेने की उनकी कला अनुकरणीय है।यही कारण है,कि असंख्य कार्यकर्ताओं के साथ-साथ अनेक प्रशासनिक अधिकारी,कर्मचारी भी उनके समर्थक हैं। ग्वालियर में जन्मे डाॅ.नरोत्तम मिश्र एम ए,पीएचडी हैं, उन्होने राजनीति का आरंभ छात्रसंघ से किया।वो सन् 1977-78 में जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर छात्रसंघ के सचिव रहे,1978-80 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य,1985-87 में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रहने के बाद 1990 में ग्वालियर जिले की डबरा विधानसभा से विधायक बने।1998 में दूसरी बार,2003 में तीसरी बार निर्वाचित हुए।1जून 2005 में बाबूलाल गौर जी के साथ प्रदेश के राज्यमंत्री बने।4 दिसंबर 2005 में शिवराज सिंह चौहान जी की कैबिनेट में पुनः स्थान मिला।2008 में चौथी बार दतिया विधानसभा से विधायक निर्वाचित होने के बाद 28 ...

" देश में नारी उत्पीड़न की घटनायें निंदनीय "

पिछले दिनो कठुआ और उन्नाव में रेप की घटना सामने आई है,यह हमारी संस्कृति के विपरीत,निंदनीय घटनायें हैं।ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों को फांसी की सजा भी कम है।यह हम सबकी जिम्मेदारी है,कि ऐसी घटनायें न हों।हमारे समाज में नारी को नारायणजी का दर्जा दिया गया है,फिर आखिर उसी नारायणी पर अत्याचार क्यों..? नारी पर अत्याचार रोकने के लिए समाज को राजनीति से हटकर चिंतन करने की आवश्यकता है।