मानव की उत्पत्ति के पूर्व से श्रृष्टि की रचना के साथ पांच तत्व हैं - जल,वायु,अग्नि,आकाश,प्रथ्वी। कभी हम कल्पना करें कि यदि इनमे से एक भी तत्व समाप्त हो जाए तो क्या होगा..? क्या जीवन संभव होगा..? हम अनभिज्ञ हैं,ऐसा नही है।सब जानते हुए भी हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए संकट पैदा कर रहे हैं।जिस तरह से पानी की बर्बादी हो रही है,वह अत्यंत खतरनाक है।वर्तमान में प्रत्येक नागरिक को एक मिशन के रूप में जलसंरक्षण पर काम करना चाहिए। आज देखा जा रहा है,कि नदी -तालाब सूख रहे हैं।प्रथ्वी का जलस्तर तेजी से घट रहा है।इसके अनेक कारण हैं,उनमें से तेजी से बढ रहे औद्योगिकरण एवं जंगलों का लगातार नष्ट होना भी है।जिससे वायु प्रदूषण के साथ जलस्तर भी नीचे जा रहा है।कुछ फैक्ट्री व कारखानों में बहुत अधिक पानी की आवश्यकता होती है,जोकि सीधे प्रथ्वी के नीचे से पानी की निकासी करते हैं। यहां तक कि हमारे घरों में भी छोटे छोटे काम के लिए भी इलेक्ट्रिक पंप के माध्यम से आवश्यकता से अधिक पानी का अपव्यय किया जाता है।हालत यह है,कि पशु पक्षियों के लिए भी पीने का पानी नहीं है। हम विचार करें कि यदि जलसंरक्षण नहीं करेंगे,...