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Showing posts from September, 2018

" Atrocities Act - जनचर्चा "

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पिछले कुछ दिनो से चारो तरफ केवल Atrocities Act की चर्चा हो रही है।भारत बंद भी हुआ,लोग सड़कों पर आए।कुछ लोगों ने Act पढ़ा,कुछ लोग दूसरों से सुनकर भ्रमित हुए।शोसल मीडिया को माध्यम बनाकर इस क...

आशा की अंधेरी साँझ और तनहाई में दम तोड़ती करोड़पति माँएं

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बीते रविवार को अमेरिका में बसे इंजीनियर ऋतुराज साहनी लंबे अरसे बाद अपने घर मुंबई लौटे तो घर पर उनका सामना अपनी माँ के कंकाल से हुआ। बेटे को नहीं मालूम कि उसकी माँ आशा साहनी की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई। आशा साहनी के बुढ़ापे की आशा उनके इकलौते बेटे ने खुद स्वीकार किया कि उसकी मां से आखिरी बातचीत कोई सवा साल पहले हुई थी। 23 अप्रैल, 2016 को माँ ने कहा था कि बेटा अब अकेले नहीं रह पाती हूं। या तो अपने पास अमेरिका बुला लो या फिर मुझे किसी ओल्डएज होम में भेज दो। बेटे ने ढाढ़स दिया कि वह जल्द ही इंडिया आएगा। वह सवा साल बाद माँ से किया वादा पूरा करने इंडिया आया, पर मां के हिसाब से देर हो गई। इसी बीच न जाने कब आशा साहनी की मौत हो गई। रविवार को ऋतुराज किसी तरह घर के भीतर घुसे तो उन्हें अपनी 63 साल की मां आशा साहनी का कंकाल मिला। आशा साहनी 10वें फ्लोर पर अकेले रहती थीं। उनके पति की मौत 2013 में हो चुकी थी। पुलिस के मुताबिक 10वीं मंजिल पर स्थित दोनों फ्लैट साहनी परिवार के ही हैं। बेटे ने अंतिम बार अप्रैल 2016 में बात होने की जानकारी ऐसे दी मानो वह अपनी माँ से कितना रेगुलर टच में था। जैस...

Atrocities Act पर एक नजर

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Atrocities Act कहो या SC-ST एक्ट या फिर हरिजन एक्ट... यह पेश किया गया था 11 सितंबर 1989 को..... लागू करने वाली पार्टी थी काँग्रेस ..... जिन्हें हमनें 414 सीटें सौंपी थी.... इसकी नियमावली बनी 1990 से लेकर 1994 के बीच तक ... जब वी.पी.सिंह जी प्रधानमंत्री थे.... जनता दल वाले...... लेकिन नियमावली बनकर लागू हुई 31 मार्च, 1995 को.... लागू करने वाली पार्टी बनी फिर से आपकी चहेती काँग्रेस जिसे आपने दी 244 सीटें.... इस दौरान आपने इस कानून के लिये कोई आंदोलन नहीं किया.... कोई विरोध नहीं किया.... आप सोये रहे.... तब आपको पता नहीं चला कि यह कानून एक अभिशाप साबित हो सकता है...... सब मस्त चल रहा था..... बल्कि जिस पार्टी ने लागू किया उसे हम लगातार सत्ता सौंप रहे थे.... खूब प्यार लुटा रहे थे..... मैंने इस कानून को डिटेल में पढा है.... सब कुछ IPC की धाराओं वाले ही अपराध इसमें है.... लेकिन यहाँ अग्रिम जमानत नहीं है.... फास्ट ट्रैक कोर्ट्स की बात है... कड़ाई ज्यादा है..... FIR दर्ज होते ही जेल है। इस कानून के पीछे के कारण क्या बताये गये थे?.... क्या आधार रखे गये थे?.. आजादी के बाद कई जगहों पर दलितों ...

करो भारत बंद और जला दो सबकुछ ! इतने टुकड़े कर दो कि नामोनिशान मिट जाए इस देश का

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*दलित, सवर्ण, ओबीसी के बीच वैमनस्य फैलाने की इस साज़िश को समझ तो पा रहे हैं ना हम??????* *क्या हम यह जान पा रहे हैं कि सोशल मीडिया पर चल रही अधिकतर पोस्ट विदेशों में बैठकर  तैयार हो रही...