" Atrocities Act - जनचर्चा "

पिछले कुछ दिनो से चारो तरफ केवल Atrocities Act की चर्चा हो रही है।भारत बंद भी हुआ,लोग सड़कों पर आए।कुछ लोगों ने Act पढ़ा,कुछ लोग दूसरों से सुनकर भ्रमित हुए।शोसल मीडिया को माध्यम बनाकर इस कानूूून को मोहरा बनाकर मोदी सरकार को सवर्ण विरोधी घोषित करने का षड्यंत्र चला।Atrocities Act लगभग 30 वर्ष पहले कांग्रेस के कार्यकाल में बना था।आखिर इस Act की आवश्यकता क्यों है..? सनातन सभ्यता में कार्यविभाजन तो था,परन्तु छुआ-छूत,और शोषण की परंपरा नहीं थी।शोषित पीड़ित वर्ग को संरक्षण देने के लिए बने इस कानून का दुरूपयोग भी हुआ,इस बात को नकारा नहीं जा सकता।परन्तु केवल इसी कानून का दुरूपयोग हुआ यह भी सत्य नहीं है।पिछले कुछ वर्षों में शासकीय कर्मचारियों द्वारा शासकीय कार्य में बाधा नामक एक कानून के दुरूपयोग के मामले भी सामने आए थे।कोई फरियादी अपनी समस्या लेकर गया,शासकीय अधिकारी से सामान्य कहा सुनी हुई और लग गया शासकीय कार्य में बाधा का आरोप।अनेक लोग इसकी चपेट में आए और जेल भी गए। ऐसे बहुत से कानून हैं,जिनका दुरूपयोग होता है।इससे स्पष्ट है,कि केवल Atrocities Act ही वो कानून नहीं है,जिसके दुरूपयोग होने की संभावनाएं हैं।
मेरा मानना है,कि जिन वर्गों के संरक्षण के लिए Atrocities Act बना है,वो भी तो हमारे भाई हैं,हमारे समाज का अभिन्न अंग हैं।ये आक्रोश,ये चिन्ता क्यों...? क्या देश को बांटने वाली ताकतें इतनी सक्रिय हैं, कि बुद्धिमान सवर्ण भी स्वयं को उनके भ्रमजाल में फसने से नहीं रोक पा रहे हैं।
क्या सामाजिक भेदभाव समाप्त हो गए हैं ? जब तक विषमता हमारे मन में समाहित रहेगी तब तक भेदभाव बने ही रहेंगे।ऐसा नहीं है,कि विषमता केवल सवर्ण समाज के मन में है।देश विरोधी शक्तियों ने पिछले वर्षों में दलित वर्ग को भी खूब भड़काया है,और आज भी समाज को बांटने की पुरजोर कोशिश में लगे हुए हैं।दलित और सवर्ण दोनो को अपने मन से विषमता का भाव समाप्त करना होगा।राजनैतिक दलों ने अपने फायदे के लिए समाज में वैमनस्यता फैलाने का काम किया है।
मैं समझता हूं कि जिस दिन इस देश से विषमता समाप्त हो जाएगी,हम हिन्दू हैं,केवल यह बात समझ में आ जाएगी।उस दिन किसी Atrocities Act की आवश्यकता नहीं रहेगी।जिस वर्ग के संरक्षण के लिए यह कानून बना है, वही वर्ग सरकार से मांग करेगा कि इस कानून को समाप्त कर दिया जाए।
समाज को जाति भेद की ओर ले जाने वाले राजनैतिक दल जिनका अस्तित्व खतरे में है,वो विदेशी दुश्मनों से मिलकर ग्रहयुद्ध कराने की फिराक में हैं,इनसे अत्यंत सावधान रहने की आवश्यकता है।
मुझे यह कहने में भी झिझक नहीं है,कि कोई अन्याय का शिकार न हो,किसी पर गलत मुकदमें न बनें,केवल शिकायत के आधार पर कोई अपराधी मान लिया जाए यह भी न्याय के सिद्धांत के विपरीत है।चाहे वह Atrocities Act हो या कोई अन्य कानून।दुरूपयोग किसी भी कानून का नहीं होना चाहिए।यह हमारी सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।

भारत आज विश्व गुरू बनने की राह पर चल पड़ा है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत विश्व पटल में अलग ही चमक रहा है।यह गति रूकनी नहीं चाहिए।विदेशी ताकतें और उनके साथ मिले राजनैतिक दल इसी तरह भ्रम फैलाने की कोशिश करेंगे।लेकिन हम सावधान होकर,हम सब एक होकर अपने देश को विश्वगुरू बनाने में सहयोग करें।

Comments

Popular posts from this blog

" कश्मीरी हिन्दुओं पर अत्याचार का दोषी कौन "

आशा की अंधेरी साँझ और तनहाई में दम तोड़ती करोड़पति माँएं

Atrocities Act पर एक नजर