जलसंरक्षण एक मिशन - पद्मेश गौतम
मानव की उत्पत्ति के पूर्व से श्रृष्टि की रचना के साथ पांच तत्व हैं - जल,वायु,अग्नि,आकाश,प्रथ्वी।
कभी हम कल्पना करें कि यदि इनमे से एक भी तत्व समाप्त हो जाए तो क्या होगा..? क्या जीवन संभव होगा..? हम अनभिज्ञ हैं,ऐसा नही है।सब जानते हुए भी हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए संकट पैदा कर रहे हैं।जिस तरह से पानी की बर्बादी हो रही है,वह अत्यंत खतरनाक है।वर्तमान में प्रत्येक नागरिक को एक मिशन के रूप में जलसंरक्षण पर काम करना चाहिए। आज देखा जा रहा है,कि नदी -तालाब सूख रहे हैं।प्रथ्वी का जलस्तर तेजी से घट रहा है।इसके अनेक कारण हैं,उनमें से तेजी से बढ रहे औद्योगिकरण एवं जंगलों का लगातार नष्ट होना भी है।जिससे वायु प्रदूषण के साथ जलस्तर भी नीचे जा रहा है।कुछ फैक्ट्री व कारखानों में बहुत अधिक पानी की आवश्यकता होती है,जोकि सीधे प्रथ्वी के नीचे से पानी की निकासी करते हैं।
यहां तक कि हमारे घरों में भी छोटे छोटे काम के लिए भी इलेक्ट्रिक पंप के माध्यम से आवश्यकता से अधिक पानी का अपव्यय किया जाता है।हालत यह है,कि पशु पक्षियों के लिए भी पीने का पानी नहीं है।
हम विचार करें कि यदि जलसंरक्षण नहीं करेंगे,तो अनाज,फल,सब्जियां जिनसे हमारा जीवन है,यदि खेतों में सिंचाई के लिए पानी ही नहीं रहेगा,तब उत्पादन कैसे होगा ?चारों तरफ भुखमरी के हालात बन जायेंगे।प्रथ्वी के अंदर का जल लगातार घटने से जमीने बंजर हो जायेंगी और भूकंप जैसे प्रलय होंगे।हमारे वायुमंडल में निरंतर तापमान बढ़ रहा है।अब तो बड़े शहरों में ठंड के मौसम में भी गर्मी जैसे वातावरण रहने लगा है।ऐसी स्थिति में पानी की कमी रहेगी तो मनुष्य और जानवर दोनों का जीवन कठिन हो जाएगा।
यदि हमें इस तरह की भयावह और विनाशकारी स्थिति से बचना है,तो जलसंरक्षण के लिए सरकार द्वारा गंभीर कदम उठाए जाने के साथ ही प्रत्येक नागरिक को इसे अपनी नैतिक जिम्मेदारी मानते हुए एक मिशन की तरह जल संरक्षण के लिए अपना योगदान देने की आवश्यकता है। क्योंकि इन पांचों तत्वों में से एक भी तत्व समाप्त होने के साथ मानव जीवन भी समाप्त हो जाएगा।
(पद्मेश गौतम)
कटनी
कभी हम कल्पना करें कि यदि इनमे से एक भी तत्व समाप्त हो जाए तो क्या होगा..? क्या जीवन संभव होगा..? हम अनभिज्ञ हैं,ऐसा नही है।सब जानते हुए भी हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए संकट पैदा कर रहे हैं।जिस तरह से पानी की बर्बादी हो रही है,वह अत्यंत खतरनाक है।वर्तमान में प्रत्येक नागरिक को एक मिशन के रूप में जलसंरक्षण पर काम करना चाहिए। आज देखा जा रहा है,कि नदी -तालाब सूख रहे हैं।प्रथ्वी का जलस्तर तेजी से घट रहा है।इसके अनेक कारण हैं,उनमें से तेजी से बढ रहे औद्योगिकरण एवं जंगलों का लगातार नष्ट होना भी है।जिससे वायु प्रदूषण के साथ जलस्तर भी नीचे जा रहा है।कुछ फैक्ट्री व कारखानों में बहुत अधिक पानी की आवश्यकता होती है,जोकि सीधे प्रथ्वी के नीचे से पानी की निकासी करते हैं।
यहां तक कि हमारे घरों में भी छोटे छोटे काम के लिए भी इलेक्ट्रिक पंप के माध्यम से आवश्यकता से अधिक पानी का अपव्यय किया जाता है।हालत यह है,कि पशु पक्षियों के लिए भी पीने का पानी नहीं है।
हम विचार करें कि यदि जलसंरक्षण नहीं करेंगे,तो अनाज,फल,सब्जियां जिनसे हमारा जीवन है,यदि खेतों में सिंचाई के लिए पानी ही नहीं रहेगा,तब उत्पादन कैसे होगा ?चारों तरफ भुखमरी के हालात बन जायेंगे।प्रथ्वी के अंदर का जल लगातार घटने से जमीने बंजर हो जायेंगी और भूकंप जैसे प्रलय होंगे।हमारे वायुमंडल में निरंतर तापमान बढ़ रहा है।अब तो बड़े शहरों में ठंड के मौसम में भी गर्मी जैसे वातावरण रहने लगा है।ऐसी स्थिति में पानी की कमी रहेगी तो मनुष्य और जानवर दोनों का जीवन कठिन हो जाएगा।
यदि हमें इस तरह की भयावह और विनाशकारी स्थिति से बचना है,तो जलसंरक्षण के लिए सरकार द्वारा गंभीर कदम उठाए जाने के साथ ही प्रत्येक नागरिक को इसे अपनी नैतिक जिम्मेदारी मानते हुए एक मिशन की तरह जल संरक्षण के लिए अपना योगदान देने की आवश्यकता है। क्योंकि इन पांचों तत्वों में से एक भी तत्व समाप्त होने के साथ मानव जीवन भी समाप्त हो जाएगा।
(पद्मेश गौतम)
कटनी


आपकी विस्व कल्याण की भावना को कोटिशः नमन यही है सच्ची विप्रता
ReplyDeleteधन्यवाद
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